शुगर के घरेलू नुस्खे
डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लांघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आंकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। हम जो भी खाते है उसे हमारा पाचन तंत्र ग्लूकोज बना कर रक्त में भेज देता है । इसे हमारे शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाने के लिए इंन्सुलीन नामक हारमोन की जरुरत होती है। जब हमारा शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता है , तब ग्लुकोज रक्त में बढता जाता है मगर कोशिकाओं के अन्दर नहीं घुस पाताहै । यही मधुमेह कहलाता है। टाइप - 1 :-- इसमें पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं और इस तरह शरीर में इंन्सुलीन का बनना सम्भव नहीं होता है। अनुवांशिक कारणों , आँटो इम्युनिटी एवं किसी प्रकार के वाइरल संक्रमण के कारण बचपन में ही बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं। यह बीमारी मुख्यतः 12 से 25 साल से कम अवस्था में मिलती है। भारत में यह बहुत ही कम मात्र 1% से 2% केसों में ही टाइप-1 के मरीज़ पाये जाते है। यूरोप विशेषकर स्वीडेन एवं फिनलैण्ड आदि में लोगो में टाइप-1 मधुमेह काफी पाया जाता है। ऐसे मरीजों इंसुलीन की सूई अनिवार्य रूप से दी जाती है। ...